परमेश्वर ने पवित्र कैलेंडर के सातवें महीने के पहले दिन को नरसिंगों का पर्व ठहराया, ताकि हम प्रायश्चित्त के दिन को स्मरण करें, जब उन्होंने मूर्तिपूजा में पड़े इस्राएलियों के पापों को क्षमा कर उन्हें दस आज्ञाओं की दूसरी तख्तियां दी थीं। और जैसे नरसिंगों के पर्व पर पश्चाताप के लिए नरसिंगे फूंके जाते थे, वैसे ही यीशु ने भी इस धरती पर आकर “पश्चाताप करो” कहते हुए मानवजाति से पश्चाताप का आग्रह किया।
जैसा कि हम उड़ाऊ पुत्र के दृष्टान्त और योना द्वारा नीनवे के 1,20,000 लोगों को उद्धार की ओर ले जाने के वृत्तांत में देखते हैं, पश्चाताप के कार्य के बाद परमेश्वर की महान आशीषें हमेशा तैयार रहती हैं। आज हमें भी, संसार की ओर लगे अपने मन और आंखों के लिए योना के समान पूर्ण पश्चाताप करना चाहिए, और सारे संसार को मसीह आन सांग-होंग और माता परमेश्वर की ओर लौटने का आह्वान करते हुए नरसिंगा फूंकना चाहिए।
“इस्राएलियों से कह कि सातवें महीने के पहले दिन को तुम्हारे लिये परमविश्राम हो; उसमें स्मरण दिलाने के लिये नरसिंगे फूँके जाएँ, और एक पवित्र सभा इकट्ठी हो।”
“प्रभु यहोवा की यह वाणी है, हे इस्राएल के घराने, मैं तुम में से हर एक मनुष्य का न्याय उसके चालचलन के अनुसार ही करूँगा। पश्चाताप करो और अपने सब अपराधों को छोड़ो, तभी तुम्हारा अधर्म तुम्हारे ठोकर खाने का कारण न होगा।”
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